बच्चों का जन्मदिन कैसे मनाएं ? Bacchon Ka Janmdin Kaise Manaye ?

AmanQnA Hindi3 years ago174 Views

बच्चों के जन्मदिन मनाते समय सबसे पहले और सबसे विशेष ध्यान तो इस बात पर देना है कि मोमबत्ती तो बिलकुल भी न जलाएं, केवल दीपक जलाने हैं ।

सबसे पहले तो मैं इसी बात का उत्तर दे देता हूँ कि मोमबत्ती बच्चों के जन्मदिन पर क्यों नहीं जलानी है ?

मोमबत्ती जब जलती है तो उसकी मोम भी पिघलते हुए नीचे गिरती है । मोमबत्ती जलते हुए स्वयं को ही नष्ट करती है ।

मोमबत्ती प्रतीक (symbol) है हमारा । आप जीवन में अपने लक्ष्य को पाने के लिए तपस्या करेंगे, परिश्रम करेंगे । तपस्या और परिश्रम तभी फल देंगे जब आपके भीतर ज्ञान होगा । किसी भी कार्य को करने के लिए सबसे पहले ज्ञान की आवश्यकता है । अपने ज्ञान को ही व्यक्ति परिश्रम और तपस्या से दर्शाता है । यह ज्ञान ही आपकी अग्नि है ।

आप ही बताइये तपस्या और परिश्रम करके व्यक्ति क्या स्वयं को नष्ट करता है या स्वयं की उन्नति करता है ?

इसीलिए बच्चों के जन्मदिन पर मोमबत्ती कभी भी न जलाएं । केवल दीपक जलाएं ।

दीपक मोक्ष का प्रतीक है । दीपक तब तक जलता रहता है जब तक उसके भीतर घी या तेल है । जब तक दीपक के भीतर तेल रहेगा तब तक दीपक समाज को प्रकाश देता रहेगा ।

मोमबत्ती प्रकाश तो देती है परन्तु स्वयं का पतन करके । दीपक प्रकाश करता है जब तक उसके भीतर तेल है । तेल यहाँ आत्मा का प्रतीक है और आत्मा का सम्बन्ध ज्ञान से है । पहले जीवन में स्वयं की उन्नति करनी है और उन्नति होती है ज्ञान, परिश्रम और तपस्या से । तपस्या यानी अनुशासन । अनुशासन मतलब जैसे स्कूल जाने का एक निश्चित समय होता है । अनुशासन मतलब निरंतरता (consistency)। किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए अनुशासन भी महत्वपूर्ण है ।

जब जीवन में आप परिश्रम और तपस्या करके अपनी उन्नति कर लें जो कि ज्ञान से संभव है, तब आप उस ज्ञान की अग्नि से समाज को प्रकाशित करें । और तब तक समाज को प्रकाश देते रहे जब तक आपके भीतर आत्मा है यानी अपने अंतिम समय तक ।

अब बात करते हैं कि बच्चों के जन्मदिन पर कितने दीपक जलाएं ?

आप जितने दीपक जलाना चाहें जला सकते हैं । बहार दीपक जलने से पड़ोसी भी आपसे पूछेंगे कि आज क्या बात है ? दीपावली तो है नहीं फिर दीपक क्यों जला रहे हो ?

और जब उन्हें पता चलेगा कि बच्चे के जन्मदिन को मनाने के लिए दीपक जला रहे हैं तब वे भी बच्चे को आशीर्वाद देंगे ।

अब थोड़ी बात केक (cake) पर भी कर लेते हैं ।

केक काट सकते हैं परन्तु उसके उप्पर मोमबत्ती जलाकर जो हम बुझाते हैं वह नहीं करना चाहिए । अग्नि ज्ञान का प्रतीक है, जैसा कि हम उप्पर बात करके आ चुके हैं । यदि जीवन से ज्ञान ही बुझ जाएगा तो जीवन से आनंद समाप्त हो जाएगा क्यूंकि व्यक्ति आनंद की अनुभूति तब ही करता है जब उसका मन शांत होता है और मन शांत तब होता है जब व्यक्ति एकाग्रचित्त होकर किसी भी काम को करता है और किसी भी काम को यदि आप एकाग्रचित्त होकर करना चाहते हैं तो उसके लिए आपके पास उस कार्य से सम्बंधित ज्ञान होना ही चाहिए । होकर 

सनातन धर्म में प्रतीक का बहुत महत्व है । किसी भी व्यक्ति को यदि कोई भी बात समझानी है और ऐसी समझानी है कि वह व्यक्ति जीवन में कभी भूले ही न उस बात को, तब प्रतीक का सहारा ही लिया जाता है ।

हनुमान चालीसा हम सब पढ़ते हैं । उसमें आने वाली पंक्तियों का अर्थ भी जानते हैं परन्तु हम यह नहीं जानते कि हनुमान चालीसा की पंक्तियाँ प्रतीक रूप में ही लिखी हुई हैं जितना मैं समझ पाया हूँ । हनुमान चालीसा हमें यह बताती है कि जीवन को जीना कैसे है, जिससे परमात्मा हमें अपने गले लगा ले । आपसे अनुरोध है कृपया एक बार नीचे दिए हुए लिंक को क्लिक करके हनुमान चालीसा के दिव्य अर्थ को पढ़ें ज़रूर ।

हनुमान चालीसा का दार्शनिक अर्थ

हो सकता है आप मुझसे सहमत ना हों परन्तु पूरी बात में ही ज्ञान न हो यह तो संभव नहीं हो सकता । जितना आपको सही लगे उतना अपना लें बाकी छोड़ दें ।

यहाँ तक इतने ध्यान से पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

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