शादी या किसी भी शुभ कार्य में काला कपड़ा क्यों नहीं पहनना चाहिए ?

AmanSpirituality3 years ago141 Views

शादी या किसी भी शुभ कार्य में काला कपड़ा क्यों नहीं पहनना चाहिए ?

इस प्रश्न में सबसे महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली यह है कि यहाँ विरोध काले रंग का है । पर क्यों ?

क्या काला रंग परमात्मा ने नहीं बनाया ? क्या काला रंग परमात्मा को पसंद नहीं है ? यदि नहीं है तो इसका क्या प्रमाण है कि परमात्मा को काला रंग पसंद नहीं है? शादी में काला रंग पहनने से क्या शादी टूट जायेगी ? ऐसे बहुत से प्रश्न हैं जो हमारे भीतर आते हैं जब कोई हमें काला रंग किसी भी शुभ कार्य में पहनने से मन करता है ?

सबसे पहले तो ऐसा कुछ नहीं है कि परमात्मा को किसी भी रंग से ना ही प्रेम है और ना ही घृणा । राग और द्वेष हम मनुष्यों को सताते हैं परमात्मा को नहीं ।

तुम्हारा पसंदीदा खाना क्या है? तुम्हें कौन सा खेल सबसे प्रिय है ? किस विषय में तुम्हारी रूचि है ? इत्यादि प्रश्न हम मनुष्यों के बनाये हुए हैं ।

पसंद – नापसंद जैसी कोई चीज़ नहीं होती ।

अब किसी को पीला रंग पसंद है तो किसी को वही पीला रंग नापसंद है । किसी को गणित का विषय अच्छा लगता है तो किसी को गणित बिलकुल नहीं भाता ।

यदि कुछ भी इस संसार में शाश्वत है तो वह धर्म है । पसंद और नापसंद से यदि कोई जीवन जीने का प्रयास करेगा तो जीवन में कभी सुखी नहीं हो पायेगा ।

एक उदाहरण से समझाता हूँ । सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना यदि किसी को पसंद नहीं है तो वह बहुत जल्दी रोग से ग्रसित हो जाएगा । यदि किसी को परिश्रम करना पसंद नहीं है तो वह जीवन में अपने लक्ष्य को नहीं पायेगा और एक अच्छा जीवन नहीं जी पायेगा । यदि किसी को घर का भोजन पसंद नहीं है और बाहर का खाना पसंद है तो वह बहुत जल्दी रोग का शिकार होगा ।

तो ऐसा कुछ नहीं है कि परमात्मा को काला रंग पसंद नहीं है । परमात्मा केवल धर्म के साथ है । और धर्म का अर्थ होता है कर्त्तव्य / जिम्मेदारी / Duty.

धर्म के विषय में मैंने बहुत विस्तार से बात करी है अपने लेख धर्म बड़ा या अध्यात्म में ? आपको नीचे लिंक दे रहा हूँ, आप इस पोस्ट को पढ़ने के बाद धर्म के विषय में और भी विस्तार से जान सकते हैं इस लेख को पढ़कर ।

धर्म बड़ा है या अध्यात्म ?

तो फिर काला रंग किसी भी पूजा में या शादी में या किसी भी शुभ कार्य में पहनने से मन क्यों किया जाता है ?

रंगों में भी जीवन होता है । अब आप कहेंगे कि कैसी पागलों वाली बात कर रहे हो ? क्या रंग सांस लेते हैं ?

जीवन का अर्थ खाली सांस लेना और छोड़ना ही नहीं होता । रंगों का जीवन अलग है । समझाता हूँ कैसे ?

आपने देखा होगा लोग अपने घर के बाहर कभी काला रंग नहीं करवाते । कभी भी नहीं । पता है क्यों ?

क्यूंकि काला रंग सूर्य की गर्मी को खींचता है और घर बाहर के तापमान से अधिक गर्म हो जाता है । क्यूंकि जितना समय काला रंग सूर्य की गर्मी को खींचता है उससे अधिक समय काले रंग को ठंडा होने में लगता है ।

ये कोई चमत्कार नहीं है, ये बस विज्ञान हैं ।

इसीलिए शास्त्रों में काला रंग अन्धकार से जोड़ा गया है । अन्धकार मतलब अज्ञान । आपने सुना भी होगा

तमसो मा ज्योतिर्गमय 

मतलब अन्धकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चलो ।

काले रंग में जीवन तो है पर अज्ञानता से भरा जीवन है । उसे नहीं पता कि सूर्य की गर्मी ज़्यादा नहीं खींचनी, मकान गर्म हो जाएगा ।

हमें शुभ कार्य में इसीलिए काले रंग से दूरी बनाने के लिए बोला जाता है जिससे हमें यह याद आ जाए कि कोई भी शुभ कार्य अज्ञान से पूर्ण नहीं होगा । किसी भी कार्य को यदि आपको पूरा करना है तो ज्ञान होना आवश्यक है ।

केवल पूजा पाठ, विवाह आदि ही शुभ कार्य में नहीं आते । आपके जीवन में यदि कोई लक्ष्य है तो वह भी शुभ कार्य में ही आएगा । लक्ष्य की प्राप्ति भी अज्ञान से दूर होकर ही होगी । बच्चों को संस्कारी बनाना भी शुभ कार्य है । यह कार्य भी अज्ञान से नहीं होगा, ज्ञान से ही संभव है ।

बात बस इतनी सी है कि काले रंग से दूरी बनाने का अर्थ है अज्ञानता से दूरी बना कर रखना क्यूंकि कोई भी शुभ कार्य अज्ञानता से संपन्न नहीं होगा केवल ज्ञान से होगा ।

 

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